Bellsonica Employees Union 1983

Bellsonica Employees Union 1983 To share the informations about union activities.

बेलसोनिका में काम करने वाले तथा यूनियन गतिविधियों में सक्रिय रहे साथी "अरुण शर्मा " की असमय निधन पर विनम्र श्रदांजलि।   ...
05/08/2026

बेलसोनिका में काम करने वाले तथा यूनियन गतिविधियों में सक्रिय रहे साथी "अरुण शर्मा " की असमय निधन पर विनम्र श्रदांजलि।
साथियों,
आज दिनांक 05 अगस्त 2026 को बेलसोनिका फैक्ट्री में काम करने वाले तथा यूनियन गतिविधियों में सक्रिय रहने वाले हमारे साथी अरुण शर्मा का कैंसर के कारण आज सुबह निधन हो गया। साथी अरुण शर्मा पिछले लगभग 8 माह से कैंसर से जूझ रहे थे।
साथी अरुण शर्मा बेलसोनिका फैक्ट्री में वर्ष 2012 से कार्यरत थे। वर्ष 2014-16 के यूनियन बनाने के संघर्ष में सक्रिय रहे थे और जिन 45 श्रमिकों ने यूनियन बनाने की शुरुआत की थी उनमें शामिल थे। वर्ष 2021 में प्रबंधन ने जब श्रमिकों की छंटनी शुरू की तो उस समय भी साथी लगातार सक्रिय भूमिका में रहे और लगातार यूनियन गतिविधियों में हिस्सा लेते रहे। सिर्फ हिस्सा ही नहीं बल्कि यूनियन गतिविधियों को संगठित करने व यूनियन गतिविधियों को सुचारु रूप से चलाने में सक्रिय भूमिका निभाते रहे।
बेलसोनिका इम्प्लॉइज यूनियन साथी अरुण शर्मा की आसामयिक निधन पर उनको अंतिम लाल सलाम पेश करते हुए भावभीनी श्रदांजलि अर्पित करती है और उनके परिवार के साथ अपनी एकजुटता प्रदर्शित करती है।

दिनांक 20 जुलाई को संसद मार्च के लिए प्रदर्शन कर रहे छात्रों - नौजवानों के ऊपर हुए बर्बर लाठीचार्ज का विरोध करो!   दिनां...
21/07/2026

दिनांक 20 जुलाई को संसद मार्च के लिए प्रदर्शन कर रहे छात्रों - नौजवानों के ऊपर हुए बर्बर लाठीचार्ज का विरोध करो!
दिनांक 20 जुलाई 2026 को छात्र संगठनों और कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा संसद तक मार्च का आह्वान किया गया था। इससे पूर्व दिनांक 18 जुलाई को दिल्ली पुलिस ने जंतर मंतर पर धरने पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचूक को मेडिकल चेकअप के बहाने सुबह सफ़ेद चादर में लपेट कर बल प्रयोग कर उठा कर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती करवा दिया था। दिनांक 20 जुलाई को छात्र संगठनों ने और कॉकरोच जनता पार्टी ने संसद तक मार्च की घोषणा की थी। पूरा प्रशासन इस मार्च को रोकने के लिए रात से ही सक्रिय हो गया था। दिल्ली पुलिस ने भारी बैरिकेटिंग लगा मार्च को रोकने की कोशिश की। लेकिन छात्रों - नौजवानों का गुस्सा वाजिब था। नौजवान संसद तक पैदल मार्च करने लगे। पुलिस द्वारा लगाए गए बैरिकेटो को नौजवानों ने लाँघ दिया और संसद की तरफ कूच करने लगे। संसद की तरफ जाने से रोकने के लिए प्रशासन ने सिर्फ बैरिकेट ही नहीं लगा रखे थे बल्कि पत्थर बाजी, आंसू गैस के गोले, पानी की बौछारे भी छोड़ी गई। जब नौजवान इन सभी को पार कर मार्च करते हुए आगे बढे तो पुलिस द्वारा बर्बर लाठीचार्ज किया गया। यहाँ तक कि बिना पुलिस की वर्दी पहने कई लोग मार्च कर रहे नौजवानों पर बर्बर लाठियाँ भांज रहे थे। यह सब "लोकतंत्र का मंदिर" कहे जाने वाले "संसद " से मात्र 50 -100 मीटर की दूरी पर हुआ। जहाँ छात्र अपनी एक वाजिब मांग के साथ संसद तक मार्च कर रहे थे और तंत्र अपने लोकतान्त्रिक मूल्यों को अपने हाथों से एक तरफ रख कर लाठी उठा कर प्रदर्शनकारियों पर भांज रहा था। दुनियां के सबसे बड़े लोकतंत्र के लिए यह शर्म की बात थी।
बेलसोनिका एम्प्लाइज यूनियन, सरकार द्वारा किए गए इस बर्बर लाठी चार्ज की घोर निंदा करती है और मजदूरों से आह्वान करती है कि सभी मजदूर इस दमन के खिलाफ एकजुट होकर पुरजोर विरोध करें।
सरकार का यह दमन दिखा रहा है कि मोदी सरकार किसी भी लोकतान्त्रिक, मजदूर, किसानों, जनवादी आंदोलन की मांगों पर बात करने की बजाय, हर असहमति की आवाज का अपने फासीवादी तौर तरीको से बर्बर दमन करेगी। नीट पेपर लीक मामले में शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग करना कोई गैर जनवादी मांग नहीं है और यह कोई एक पेपर लीक का मामला नहीं है। हर साल पेपर लीक होते है और ढेरों नौजवान छात्रों का भविष्य अंधकार में डूब जाता है और कई छात्र इस तनाव में ख़ुदकुशी कर लेते है। साल दर साल यही प्रक्रिया दोहराई जाती है। सरकार जाँच के नाम पर कुछ लीपा - पोती कर असल कारणों से ध्यान हटा देती है। जिसे प्रमुख खबरिया चैनल पाकिस्तान का हाथ बताकर उसे साम्प्रदायिक रूप देकर मामले पर मिट्टी डाल देते है।
इससे पहले आप सभी ने देखा है कि किस तरह अप्रैल माह में मानेसर, नोएडा, उत्तराखंड, राजस्थान, पंजाब समेत उत्तर भारत में ठेका मजदूरों ने 11000 रूपए न्यूनतम वेतन मिलने से दयनीय जीवन परिस्थितियों से तंग आकर न्यूनतम वेतन 20 हजार रूपए करने की मांग को लेकर हड़ताल की थी। मजदूरों के न्यूनतम वेतन बढ़ाने की बजाय तमाम राज्य सरकारों ने हजारों मजदूरों व मजदूर कार्यकर्ताओं पर संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जेलों में ठूस दिया। सरकार ने खबरिया चैनलों पर मीडिया ट्रायल चलवाकर आंदोलन का समर्थन कर रहे मजदूर संगठनों के कार्यकर्त्ताओं को साजिशकर्ता दिखाकर उनके ऊपर संगीन धाराएं लगाई व इस मजदूर आंदोलन में पाकिस्तान का हाथ बताया गया।
मोदी सरकार बड़ी बेशर्मी से एकाधिकारी पूंजी की सेवा में तत्पर है। वह किसी भी असहमति की आवाज को, मजदूरों, किसानों, छात्रों - नौजवानों, महिलाओं, आदिवासियों इत्यादि के आंदोलनों का बर्बर दमन कर रही है और आंदोलन का समर्थन करने वाले संगठनों के कार्यकर्ताओं को संगीन धाराओं में जेलों में ठूस रही है। कॉर्पोरेट मीडिया एकाधिकारी की पूंजी में आर. एस. एस. का प्रचारक बना हुआ है। अब इस फासीवादी निज़ाम की ओर बढ़ रहे खूनी रथ को तमाम मजदूर वर्ग को, जनवादी आंदोलन, नौजवानों के आंदोलन, किसानों के आंदोलन इत्यादि को एकजुटता कायम करते हुए रोकना होगा।
क्रांतिकारी अभिवादन के साथ
बेलसोनिका एम्प्लाइज यूनियन 1983

20/07/2026

बेलसोनिका प्रबंधन फिर से स्थाई मजदूरों की छंटनी की कर रहा तैयारी!

मानेसर मजदूरों के न्यूनतम वेतन के साथ अन्य मांगो को लेकर चल रहे आंदोलन में बेलसोनिका यूनियन के कोषाध्यक्ष पिंटू कुमार या...
30/05/2026

मानेसर मजदूरों के न्यूनतम वेतन के साथ अन्य मांगो को लेकर चल रहे आंदोलन में बेलसोनिका यूनियन के कोषाध्यक्ष पिंटू कुमार यादव को आज जमानत मिल गई है। इनके साथ ही आज मुंजाल शोवा के ठेका मजदूर आकाश व इंकलाबी मजदूर केंद्र के साथी श्यामवीर, हरीश व राजू को भी जमानत मिल गई है। आपको ज्ञात होगा कि दिनांक 18.05.2026 को यूनियन के महासचिव अजीत सिंह को जमानत मिली थी।
इस न्याय के संघर्ष में यूनियन के साथ खड़े मजदूरों, न्यायपसंद लोगों, संगठनों, पत्रकारों, छात्रों व वकीलों आदि का यूनियन फिर से धन्यवाद करती है।
संघर्ष अभी जारी है!
इंकलाब जिंदाबाद!

20/05/2026
19/05/2026

बेलसोनिका एम्प्लाइज यूनियन के महासचिव अजीत सिंह जेल से बाहर आते हुए। सभी सहयोगी साथियों का यूनियन फिर से धन्यवाद करती है।

जानते है कि कोर्ट में क्या हुआ?
अदालत में अजीत सिंह की तरफ से वरिष्ठ वकील वृंदा ग्रोवर ने कहा कि जिस दिन हिंसा की बात कही जा रही है, उस दिन अजीत मौके पर मौजूद नहीं थे। उनके खिलाफ हिंसा भड़काने से जुड़ी कोई ठोस सामग्री भी नहीं है।

बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि गिरफ्तारी के समय कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया और परिवार को सूचना तक नहीं दी गई।

सुनवाई के दौरान पुलिस ने अदालत में अजीत सिंह के भाषण का वीडियो चलाया। वीडियो में वह मजदूरों के सैलरी और अधिकारों पर बात कर रहे थे।

अदालत ने मौखिक टिप्पणी में कहा कि पुलिस हिरासत जारी रखने के लिए पर्याप्त सामग्री पेश नहीं कर सकी।

इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, सरकारी वकील ने माना कि हिंसा वाले दिन सिंह घटनास्थल पर मौजूद नहीं थे। हालाँकि, पुलिस ने आरोप लगाया कि उन्होंने एक साज़िश रची थी और घटना से पहले एक व्हाट्सऐप ग्रुप में पोस्ट किए गए मैसेज और एक सार्वजनिक भाषण के ज़रिए मज़दूरों को उकसाया था।

लेकिन, पुलिस द्वारा पेश किए गए इलेक्ट्रॉनिक सबूत कोर्ट में खरे नहीं उतरे। जब जाँच अधिकारी ने कोर्ट में अजीत सिंह के भाषण का एक वीडियो चलाया, तो जज ने पाया कि उसमें “दैनिक ज़रूरतों की बढ़ती कीमतों के मुकाबले कम मज़दूरी के कारण मज़दूरों को पेश आ रही समस्याओं के बारे में अपील के रूप में दिए गए भाषण के अलावा कुछ भी आपत्तिजनक नहीं था।”

सरकारी पक्ष द्वारा यह स्वीकार करने के बाद कि 4 अप्रैल के भाषण की बाद की ट्रांसक्रिप्शन में भी कुछ भी आपत्तिजनक नहीं था, जज ने फ़ैसला सुनाया कि 13 अप्रैल से सिंह को बिना किसी प्रथम दृष्टया सबूत के जेल में रखना अवैध हिरासत के बराबर था।

कोर्ट ने कहा, “उन्हें गिरफ़्तार करने का कोई सबूत नहीं दिखाया गया है और वे 13.04.2026 से हिरासत में हैं। यह बिना किसी सबूत के आवेदक-आरोपी की अवैध हिरासत के बराबर है… प्रथम दृष्टया, आज तक आवेदक-आरोपी के ख़िलाफ़ कोई भी आपत्तिजनक सबूत नहीं दिखाया गया है।”

आरोपी की वकील वृंदा ग्रोवर ने दलील दी कि अजीत सिंह, जिनकी सेवाएँ उनके नियोक्ता द्वारा तब से समाप्त कर दी गई हैं, को 12-13 अप्रैल की दरमियानी रात को उनके गुड़गाँव स्थित घर से उठाया गया था, लेकिन पुलिस उन्हें गिरफ़्तारी के आधार बताने में नाकाम रही।

94/2026 FIR में मानेसर, गुड़गांव से कुल 17 साथी है। जिसमें से पहले अंकित और दूसरे अजीत सिंह की बेल हो चुकी है और 15 साथी अभी भी जेल में है।

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इंकलाब जिंदाबाद!

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बेलसोनिका एम्प्लाइज यूनियन के महासचिव अजीत सिंह को आज गुड़गांव सेशन कोर्ट माननीय गगन गीत कौर की अदालत से जमानत मिल गई है...
18/05/2026

बेलसोनिका एम्प्लाइज यूनियन के महासचिव अजीत सिंह को आज गुड़गांव सेशन कोर्ट माननीय गगन गीत कौर की अदालत से जमानत मिल गई है। इसमें बहुत से जनसंगठनों, क्रांतिकारी संगठनों, किसान संगठनों, महिला संगठन, वकीलों, पत्रकारों व छात्रों आदि ने अपनी अपनी भूमिका निभाई। बहुत सारे लोगों ने इस न्याय की लड़ाई हेतु आर्थिक सहयोग भी दिया है। इस लड़ाई हेतु जन संगठनों, यूनियनों, ट्रेड यूनियनों, न्याय प्रिय लोगों, मजदूरों, छात्रों व किसानों आदि द्वारा सभा, प्रदर्शन व ज्ञापन आदि के कार्यक्रम आयोजित किए गए, इन सभी कार्यवाहियों को करने वालों को बेलसोनिका एम्प्लाइज यूनियन की ओर से तहेदिल से धन्यवाद!
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