28/06/2026
हे उधौ , ई चूतियन को देश .......!!!!
पाकिस्तान से कारगिल के बाद , युद्ध लडने चले थे हम। पहला वार भी हमारा था ,और करारा भी था । पहलगाम का बदला विध्वंसक तरीके से लिया गया ।
मात्र चार दिन की कार्यवाही मे उनके 11 एयरबेस तबाह हुए, ब्रह्मोस की ऐक्युरेसी दुनिया ने देखी । पाकिस्तान के पलटवार को भी न्यूट्रिलाईज किया गया ।
जहाँ एक ओर पाकिस्तान की मिलिट्री कैजुलिटी 150 से उपर थी । इंडिया मे 30 से ऊपर सिविलियन कैजुल्टीज हुई । पहले दिन से देश जानता था कि , हमारी भी कुछ कैजुल्टियां हुई है ।
इतने बडे पैमाने पर चले मिलिट्री आपरेशन मे 6 कैजुल्टियां कुछ नही होती , इन्हे नगण्य माना जाता है ।
सवाल ये है कि , क्या ये कैजुल्टियां पाकिस्तानी हमलो या फिर उनकी आर्टिलरी फायर से हुई थी ???? तो जवाब है नही ।
इन 6 कैजुल्टियों मे से , 4 कैजुल्टियां अपनी ही गन की बैरल का ब्रीच फटने से हुई , जबकि दो कैजुल्टियां का कारण था ,आपरेशनल एक्शन के दौरान पेश आये हादसे यानि एक्सीडेंट्स ।
इन 6 सैन्यकर्मियो मे से एक भी पाकिस्तानी फायरिंग , बमबारी , ड्रोन अटैक की चपेट मे आने से नही मरा , शहादत के कारण कुछ और थे ।
और ऐसा भी नही है कि इनके बारे मे देश से छुपाया गया या फिर झूठ बोला गया । शहीद हुए सैनिको के शव बाकायदा उनके घर भेजे गये , और पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार भी किया गया , और नियमानुसार , वित्तीय लाभ भी मिले ।
तो सरकार ने ऐसा क्या छुपा लिया , जिसे चीर फाड कर तुम चूतिया नंदनो की मेज पर पेश करना था कि ये देख लो जी , ऐसे हुआ , ये हुआ था ।
और तुम हो कौन ???
कुछ नही हो , या तो रिबोर्न टाईप के चमन चूतिये हो , या फिर छाती कूट रूदाली मे माहिर , सेल्फ गोल करने वाले उस स्तर के बकलोल , कि जिसे उसकी बीवी और बच्चे तक सीरियसली नही लेते ।
बेवजह तूफान मचाया हुआ है । बेशक ये 6 कैजुल्टियां आपरेशन सिंदूर के दौरान हुई , मगर किसी भी कैजुल्टी के लिए , Enemy Action जिम्मेदार नही है , हमारे अपने मैकेनिज्म की खामियों के चलते जान गई है । और ऐसा होना कोई असाधारण घटना नही है , ये तो होता ही है , जरा से मोबिलाईजेशन मे ही इससे कहीं ज्यादा कैजुल्टियां हो जाती है ।
13 दिसम्बर , 2001 को भारतीय संसद पर हमला हुआ । संसद जोश मे आकर एकमत हुई , और युद्ध के बादल छा गये , युद्ध के लिए सेनाऐं बोर्डर की तरफ मूव कर दी गई ।
भारत और पाकिस्तान के बीच , युद्ध के लिए , हिस्ट्री का सबसे बडा Military standoff हुआ , नाम दिया गया था "आपरेशन पराक्रम" हम पाकिस्तान के साथ एक युद्ध करने जा रहे थे । ऐसा युद्ध जो कभी हुआ ही नही ।
जिस युद्ध मे एक भी मिसाईल फायर नही हुई , एक भी आर्टिलरी का गोला ना उधर गिरा , ना इधर गिरा , ना हवाई जहाजो की डाॅगफाईट हुई , ना ही कोई ऐरियल ऐंगेंजमेंट , ना ही बमबारी , ना हवाई अड्डो पर बम बरसे , या मिसाइले लाँच हुई । यहाँ तक कि एक गोली तक फायर नही हुई ।
इस मिलिट्री Standoff मे दुनिया ने भारत का , और उसकी सैन्य ताकत का जुलूस निकलते देखा । भारत ने कुल 8 लाख सैनिक मोबिलाईज किये , पाकिस्तान ने लगभग 4 लाख ।
14 जनवरी 2002 को D-day के लिए चुना गया था , जिस दिन भारतीय फौजो को पाकिस्तान मे घुसना था । मगर ये युद्ध कभी हुआ ही नही , एक गोली तक नही चली बाॅर्डर पे ।
कुछ ऐसा घटित हुआ कि ये आपरेशन कभी युद्ध मे कन्वर्ट ही नही हुआ । क्योंकि सरकार की समझ मे आ चुका था कि अगर युद्ध हुआ ,तो नतीजे भयावह होंगें । क्योंकि भारतीय सेना की हालत ठीक नही थी ।
पाकिस्तान ने एक हफ्ते मे , बगैर कोई नुकसान उठाये , अपनी पूरी फौज को तैयारी हालत मे बाॅर्डर पर ला खडा किया , युद्ध के लिए एकदम तैयार हालत मे ।
जबकि भारत को पूरे 6 हफ्ते लग गये फौज को मोबिलाईज करने मे । और नुकसान का अंदाजा लगाकर ही सरकार के हाथ पाँव काँप गये थे ।
"आपरेशन पराक्रम " मे केवल फौज को मूव करने मे हमने अपने 798 सैनिक खोये । घायलो की संख्या को भी जोडे , तो आपरेशन पराक्रम मे कुल 1874 कैजुल्टियां हुई थी । इस पैमाने पर हुए नुकसान ने , सरकार की आँखे खोल दी , और युद्ध को टाल दिया गया ।
बगैर एक भी गोली चले , बगैर किसी झडप के , हमने 798 सैनिक खो दिये । कुल कैजुल्टियां तो 1874 थी । तो फिर ये सैनिक मृत्यु को कैसे प्राप्त हुए ????
पता लगाईये , रिसर्च का विषय है फेसबुकिये छछूंदर लंबोडियो गपोडियो के लिए । सरकार ने बाकायदा पता लगाने के लिए , ऐडमिरल अरूण प्रकाश की अध्यक्षता मे , एक कमैटी का गठन किया था । जिसकी रिपोर्ट संसद मे रखी गई थी , ऐडमिरल अरूण प्रकाश ने बताया था कि आपरेशन पराक्रम के Military Standoff के दौरान 900 सैनिको की मृत्यु हुई थी , कारण था , ऐक्सीडेंट , बीमारिया , वाहनो से कुचला जाना , माईंस लगाते समय , माईंस मे विस्फोट , आर्टिलरी की तोपो के गोलो मे विस्फोट , वगैरह वगैरह ........
आपरेशन पराक्रम , ने हमारी रक्षा तैयारियो को आईना दिखा दिया था तो हमे युद्ध टालना पडा । एक ऐसा युद्ध जो कभी हुआ ही नही , उसके लिए सरकार ने बाकायदा मैडल और रिबन भी जारी किया । आपरेशन पराक्रम मेडल , और उसका रिबन , आज भी फौजी सीने पर लगाये घूमते है ।
इतनी किरकिरी काफी नही थी । अभी तो और भी कपडे उतरने बाकी थे। आपरेशन पराक्रम के दौरान जो माईंस बोर्डर पर लगाई गई थी , उनके कारण अगले कुछ सालो मे , 1200 से ज्यादा भारतीय सिविलियन नागरिको की भी मौते हुई ।
आज भारत के किसी भी "वाॅर मैमोरियल " पर जाकर देख लीजिए "आपरेशन पराक्रम " मे शहीद हुए नामो की पट्टिकाऐं मिल जायेंगी।
तुमने पूछा सरकार से कभी कि ये 900 सैनिक कैसे मारे गये , क्यूँ मारे गये ??? कौन से युद्ध मे शहीद हुए ?? किसको मारकर मरे ???
क्या कभी सरकार ने , वाॅर मैमोरियल पर आपरेशन पराक्रम के तहत शहीद हुए इन सैनिको के नाम तुम्हे लिखकर बताये थे ???
आज सरकार ने 6 जवानो के नाम बता दिये तो चले है चूतिये प्याली मे तूफान खडा करने । जबकि सिंदूर मे तो पाँच दिनो तक बाकायदा जंग चली थी । पाकिस्तान को तबियत से फोडा गया था ।
आर्मी भी ,दूसरे ओर्गेनाईजेशनो की तरह एक संगठन ही है । मौत का कारण हमेशा दुशमन फौज का पलटवार , या जंग ही नही होता । हार्ट अटैक , मौसम की मार , फ्रैंडली फायर की चपेट मे आना , अपने ही गोला बारूद मे विस्फोट हो जाना , वाहन का ऐक्सीडेंट , गलती से ग्रेनेड फट जाना , और भी कई कारण होते है ।
राजनाथ ने अगर संसद मे बोला भी है कि आपरेशन सिंदूर मे पाकिस्तान की जवाबी कार्यवाही से हमे कोई नुकसान नही हुआ , तो गलत क्या बोला है ????
रिबोर्न जैसे चूतिये प्याली मे तूफान खडा कर सकते है । और फिर कांग्रेसी टूल किट तो है ही बवंडर मचाने को ।
मगर असल मिट्टी के माधो तो वो चूतिये है , जिन्हे अता पता कुछ नही नही बस गीदडो की तरह हुँवा हुँवा करनी होती है ।
बोटली वालो , वहीं खडा है "नेशनल वार मैमोरियल " और वही अंकित है उन 900 सैनिको के नाम । जाओ पूछ लो संसद मे , कि जब एक भी गोली नही चली , कोई युद्ध नही हुआ , Cross border एक्शन नही हुआ , तो ये हमारे 900 सैनिक , कहाँ गायब हो गये ???
फिर अच्छे लगोगे , 6 सैनिको के नाम पर छाती पीटते हुए ।
Rajeev Kumar ji See less