29/07/2026
कार की Wheel Balancing कराने के कई फायदे होते हैं:
टायर की उम्र बढ़ती है – टायर समान रूप से घिसता है, इसलिए जल्दी खराब नहीं होता।
स्टीयरिंग में कंपन (Vibration) खत्म होता है – खासकर 60–100 किमी/घंटा की स्पीड पर।
आरामदायक ड्राइविंग – गाड़ी ज्यादा स्मूद चलती है।
सस्पेंशन और व्हील बेयरिंग की सुरक्षा – इन पार्ट्स पर अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ता।
बेहतर माइलेज – संतुलित पहियों से गाड़ी आसानी से चलती है, जिससे ईंधन की बचत में मदद मिल सकती है।
सुरक्षा बढ़ती है – हाईवे पर गाड़ी अधिक स्थिर रहती है और कंट्रोल बेहतर मिलता है।
टायर का शोर कम होता है – असंतुलित टायर से आने वाली आवाज़ कम हो सकती है।
Wheel Balancing कब करानी चाहिए?
नए टायर लगवाने के बाद
पंचर बनने के बाद
4,000–5000 किमी चलने पर
अगर स्टीयरिंग में कंपन महसूस हो
टायर रोटेशन के बाद