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ज्ञानगच्छाधिपति १००८ पूज्य गुरुदेव श्रुतधर पंडित रत्न श्री प्रकाशचंद्रजी म.सा. के आज्ञानुवर्ती *पूजनीया श्री एक (प्रगतिज...
13/12/2025

ज्ञानगच्छाधिपति १००८ पूज्य गुरुदेव श्रुतधर पंडित रत्न श्री प्रकाशचंद्रजी म.सा. के आज्ञानुवर्ती *पूजनीया श्री एक (प्रगतिजी म सा बालोतरा वाले)महासतीजी का आज पाली राज• से 10 कि मी पहले एक्सीडेंट हुआ है,जिसमे पाव मे चोट लगी है,अभी गोतम किरण धाम हाथलाई पर रुके हुए है,सुबह पाली पहुंचेगे।सभी से निवेदन है सुपर फोर लाईन, सिक्स लाईन, भारत माला आदि हैवी ट्राफिक पर विहार नही हो,ओर विशेष कारण वश करना पङे तो विहार वाले भाई के साथ अपने स्थानीय भाई विशेष ध्यान देवे।ओर महापुरुषो का सुरक्षित विहार सुनिश्चित करने का विनम्र निवेदन है।🙏🙏 सादर जयजिनेनदर
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दोघट गांव निवासी हर्षित जैन ने महज 30 साल की उम्र में वैराग्य धारण कर लिया है. वह पेशे से कपड़ा व्यापारी हैं जिनका एक कर...
06/12/2025

दोघट गांव निवासी हर्षित जैन ने महज 30 साल की उम्र में वैराग्य धारण कर लिया है. वह पेशे से कपड़ा व्यापारी हैं जिनका एक करोड़ से ऊपर का टर्नओवर है. दिल्‍ली के चांदनी चौक में उनका शोरूम है. कोरोना काल में जन्म-मरण का खेल देखकर जीवन के बारे में उनकी धारणा बदल गई. उन्होंने हर सुख त्याग कर वैराग्य धारण कर लिया है. 4 साल बाद लिए इस निर्णय से हर्षित जैन बहुत खुश हैं. जैन मुनि से दीक्षा लेकर वह जैन मुनियों जैसा सादा जीवन जियेंगे.

हर्षित जैन बताते हैं कि कोविड काल में उन्होंने सत्य को करीब से जाना है. 2019 के अंत में जब कोविड आया पूरे देश में हाहाकार मच गया. बड़े शहरों में काम करने वाले लोग अपने गांव लौट गए. सभी जगह लॉकडाउन लग गया. बीमारी को देखकर लोग एक दूसरे से दूर भागते थे. कोई किसी के काम नहीं आ रहा था. अपनों की मौत के बाद उनको कोई कंधा देने वाला भी नहीं था. भाई से भाई दूर हो गया. बीमार भाई को दूर से ही खाना दिया जा रहा ह.। कोई पास नहीं आ रहा था. सभी को मौत का डर सता रहा है. किसी में कोई अपनापन नहीं. इंसान अकेला सा रह गया. जब मैंने यह मंजर देखा तो जीवन के बारे में मेरी धारणा बदल गई.

*दीक्षा पथ पर अग्रसर हमारे पूर्वांचल कोलकाता का लाड़ला 17 वर्षीय अर्हम सिंघी की आगामी ज्ञान यात्रा मंगलमय हो।*तेरापंथ धर...
18/08/2025

*दीक्षा पथ पर अग्रसर हमारे पूर्वांचल कोलकाता का लाड़ला 17 वर्षीय अर्हम सिंघी की आगामी ज्ञान यात्रा मंगलमय हो।*
तेरापंथ धर्मसंघ के एकादशम अनुशासता युगप्रधान, महा तपस्वी आचार्य श्री महाश्रमण जैसे गुरु के चरणों में समर्पित यह जीवन बने आत्मकल्याण का साधन 🙏💐🎉

जय गुरुदेव 😭😭 fans Jainism Followers जैन धर्म के अनुयायी Bhagwan Roop Chand Swami
06/08/2025

जय गुरुदेव 😭😭
fans Jainism Followers जैन धर्म के अनुयायी Bhagwan Roop Chand Swami

06.08.2025, बुधवार, कोबा, गांधीनगर (गुजरात) प्रज्ञावान आरम्भ से होता है उपरत : महातपस्वी आचार्यश्री महाश्रमण- आगम के माध...
06/08/2025

06.08.2025, बुधवार, कोबा, गांधीनगर (गुजरात)

प्रज्ञावान आरम्भ से होता है उपरत : महातपस्वी आचार्यश्री महाश्रमण

- आगम के माध्यम से आचार्यश्री ने की निश्चय नय व व्यवहार नय की व्याख्या

- तेरापंथ प्रबोध की आख्यान शृंखला से भी जुड़ी श्रद्धालु जनता

धर्म की साधना में अहिंसा की आराधना आवश्यक होती है। अहिंसा का पालन करना है तो हिंसा से निवृत्त होना होता है। ‘आयारो’ आगम में बताया गया है कि जो प्रज्ञावान होता है और जो बुद्ध होता है, वह आरम्भ से उपरत होता है। निश्चय नय और व्यवहार नय- ये दो प्रकार की दृष्टियां बताई गई हैं। व्यवहार में स्थूल दृष्टि होती है और निश्चय नय में सूक्ष्म दृष्टि होती है। एक आदमी कहता है मैं अकेला हूं और दूसरा कहता है मेरे साथ मेरा परिवार व मेरा समाज मेरे साथ है। इन दोनों ही बातें सही हो सकती हैं। मैं अकेला हूं वाली बात अध्यात्म के संदर्भ में आदमी अकेलापन की बात सोचता है कि मैं अकेला आया हूं, अकेले कर्म भोग रहा हूं, फिर अकेले ही कर्मों का बंधन कर रहा हूं और एक दिन अकेले ही चले जाना है। इस दृष्टि से मैं अकेला हूं कि बात भी सही है। वहीं व्यवहार नय से देखें तो पूरा परिवार और समाज साथ है तो यह भी बात सत्य है कि कोई कठिनाई आती है, कोई समस्या होती है तो परिवार और समाज के लोग सहयोग करते हैं। बीमारी हो जाने पर परिजन अस्पताल ले जाते हैं, उपचार आदि कराते हैं। इस प्रकार परस्पर सहयोग की वृत्ति भी समाज में देखी जाती है। इसलिए कहा गया भी गया है कि ‘परस्परोपग्रहो जीवनाम्’ अर्थात परस्पर जीवों का सहयोग एक-दूसरे को प्राप्त होता है।

जो आदमी प्रज्ञावान होता है, वह निश्चय नय का ध्यान देता है। स्वयं को अकेला मानकर अपनी आत्मा की ओर ध्यान देता है, वह आदमी आरम्भ हिंसा को भी छोड़ देता है। प्रज्ञावान जो है, वह आरम्भ से उपरत हो सकता है। जिसमें विवेक आ गया, वह बुद्ध होता है। वह अपनी आत्मा के हित के विषय में चिंतन करते हुए आरम्भजा हिंसा से बचता है। सावद्य कार्यों से उपरत रहते हुए वह अपनी आत्मा के कल्याण की दिशा में आगे बढ़ने का प्रयास करता है। अपनी आत्मा का कल्याण करने के लिए आदमी को निश्चय नय की दृष्टि से विवेक रखते हुए आगे बढ़ने का प्रयास करना चाहिए। आदमी को अपने भीतर रहना और बाहर जीना चाहिए।

जितना संभव हो सके, आदमी को अनासक्ति की भावना रखने का प्रयास करना चाहिए। अनासक्ति की चेतना का विकास होता है तो आदमी हिंसा से भी बच सकता है और अपनी आत्मा को अध्यात्म की दिशा में आगे ले जा सकता है। उक्त पावन पाथेय बुधवार को जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के एकादशमाधिशास्ता, युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी ने बुधवार को ‘वीर भिक्षु समवसरण’ में समुपस्थित श्रद्धालुजनों को ‘आयारो’ आगम के माध्यम से प्रदान किया।

आगमवाणी का अमृतपान कराने के उपरान्त आचार्यश्री ने ‘तेरापंथ प्रबोध’ के सरस संगान और आख्यान से भी श्रद्धालुओं को लाभान्वित किया। आचार्यश्री के पावन पाथेय के उपरान्त साध्वीवर्याजी ने समुपस्थित लोगों को उद्बोधित किया। अनेकानेक तपस्वियों ने अपनी-अपनी धारणानुसार आचार्यश्री से तपस्या का प्रत्याख्यान ग्रहण किया। मुनि मदनकुमारजी ने लोगों तपस्या के संदर्भ में प्रेरणा दी।

*श्रीमती शीला देवी धर्मपत्नी श्रीमान देवराज जी सिंगला निवासी संगरूर जी का संथारा 6/8/2025 को सवेरे 1.50बजे सीज गया*
06/08/2025

*श्रीमती शीला देवी धर्मपत्नी श्रीमान देवराज जी सिंगला निवासी संगरूर जी का संथारा 6/8/2025 को सवेरे 1.50बजे सीज गया*

नवदीक्षित मुनि श्री 108 धर्मसागर जी मुनिराज की श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन उपवन मंदिर जी बेलगाछिया (कोलकाता)के संत निवास...
05/08/2025

नवदीक्षित मुनि श्री 108 धर्मसागर जी मुनिराज की श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन उपवन मंदिर जी बेलगाछिया (कोलकाता)के संत निवास में समाधि हो गई है।*
नमोस्तु गुरुदेव🙏🏻
ॐ शांति ॐ शांति ॐ शांति 🙏🏻🙏🏻🙏🏻

05/08/2025

पूज्य गुरुदेव सेठ श्री प्रकाश चंद जी महाराज

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आचार्य श्री 108 समय सागर जी महाराज 🙏💖
05/08/2025

आचार्य श्री 108 समय सागर जी महाराज 🙏💖

सरलता सहजता और साधना का पर्याय पूज्य  श्री सेठ जी महाराज का देवलोक गमन हरियाणा की हरित धरती पर स्थित सोनीपत जनपद में गोह...
05/08/2025

सरलता सहजता और साधना का पर्याय पूज्य श्री सेठ जी महाराज का देवलोक गमन

हरियाणा की हरित धरती पर स्थित सोनीपत जनपद में गोहाना के टी.पी.एस. पब्लिक स्कूल में विराजित जन-जन की श्रद्धाओं के आधार गच्छाधिपति परम पूज्य श्री सेठ प्रकाश चंद्र जी महाराज का संलेखना और संथारे सहित आज सायं काल लगभग 6:15 बजे इस भौतिक नश्वर देह को छोड़कर भव परिवर्तन (देवलोक गमन) हो गया है ।

कहते हैं भगवान अनेक रूपों में आते हैं,
कभी माँ के रूप में, कभी गुरु के रूप में और कभी "सेठ जी महाराज" के रूप में......

जिन्होंने बिना शोर किए
हजारों ज़िंदगियाँ रोशन कर दीं।
आज वो चले गए…
पर उनके कर्म अमर हो गए।

पूज्य गुरुदेव सेठ श्री प्रकाश चंद जी महाराज की अंतिम यात्रा 7 अगस्त वीरवार को प्रातः 10:00 बजे टी पी एस पब्लिक स्कूल से प्रारंभ होकर गोहाना के प्रमुख बाजारों से होती हुई टी पी एस पब्लिक स्कूल पहुंचेगी

तपस्या की खूब खूब अनुमोदना एवं सुख साता की मंगलकामना 🙏🙏
05/08/2025

तपस्या की खूब खूब अनुमोदना एवं सुख साता की मंगलकामना 🙏🙏

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