Ranju Virk

Ranju Virk Happy to halp

23/03/2022

इस पोस्ट को संभाल कर रख लेना जब भी बनावटी दुनिया से मोह पड़ने लगे यह पोस्ट पढ़ लेना

मनोहर पर्रिकर की आख़री लेखनी के कुछ अंश*

जीवन ने मुझे राजनीति में बहुत सम्मान दिलाया जो मेरे नाम का पर्याय बन गया। हालांकि मैंने इस बात पर अब ध्यान दिया कि काम के अलावा मैंने कभी आनंद के लिए समय नहीं निकाला। सिर्फ मेरा पॉलिटिकल स्टेटस ही हकीकत रहा। आज बिस्तर पर पड़े हुए मैं अपने जीवन के बारे में सोच रहा हूं… लोकप्रियता और धन… और मुझे यही जीवन में मील के पत्थर लगते थे, मौत का सामना करते हुए ये सब निरर्थक लग रहे हैं।

हर सेकेंड के साथ मौत मेरी ओर चुपचाप बढ़ रही है, मैं अपने आसपास जीवनरक्षक मशीनों की हरी बत्ती देख रहा हूं, उनके शोर से मैं मौत से नजदीकी को महसूस कर रहा हूं। इस कठिन घड़ी पर मुझे समझ में आ रहा है कि जीवन में पैसा और रुतबा इकट्ठा करने के अलावा और भी बहुत कुछ है… समाजसेवा और हम जिन्हें पसंद करते हैं उनके साथ रिश्ते निभाना ऐसी चीजें हैं जिसमें हमें चूकना नहीं चाहिए। मैं यह महसूस करता हूं कि जितनी भी राजनीतिक सफलता मैंने अर्जित की है, मैं अपने साथ कुछ भी नहीं ले जाऊंगा।

यह बीमारी का बिस्तर ही सबसे एक्सक्लूसिव बेड है क्योंकि इसे आपके अलावा कोई और इस्तेमाल नहीं कर सकता। आपके पास नौकर, ड्राइवर, काम करने वाले और आपके लिए कमाने वाले हो सकते हैं लेकिन आपकी बीमारी कोई साझा नहीं करेगा। सबकुछ पाया और कमाया जा सकता है लेकिन वक्त लौटकर नहीं आता।

जब आप जीवन की दौड़ में सफलता के पीछे भागते हैं तो आपको अहसास होना चाहिए कि कभी न कभी आपको इस नाटक के आखिरी हिस्से में पहुंचना होगा जहां शो का लास्ट सबके सामने है।

इसलिए… सबसे पहले अपनी देखभाल करना सीखें, दूसरों की केयर करें, अपना पैसा और भावनाएं अपने आसपास के लोगों पर खर्च करना सीखें।

जब एक बच्चा पैदा होता है तो वह रोता है और जब मरता है दूसरे रोते हैं इसलिए दोस्तों आखिरी दिन से पहले खूब खुश हो लें......

*मनोहर पर्रिकर*

17/03/2022

अमेरिका की बात हैं. एक युवक को व्यापार में बहुत नुकसान उठाना पड़ा. उसपर बहुत कर्ज चढ़ गया, तमाम जमीन जायदाद गिरवी रखना पड़ी . दोस्तों ने भी मुंह फेर लिया, जाहिर हैं वह बहुत हताश था. कही से कोई राह नहीं सूझ रही थी. आशा की कोई किरण दिखाई न देती थी.
एक दिन वह एक पार्क में बैठा अपनी परिस्थितियो पर चिंता कर रहा था. तभी एक बुजुर्ग वहां पहुंचे. कपड़ो से और चेहरे से वे काफी अमीर लग रहे थे. बुजुर्ग ने चिंता का कारण पूछा तो उसने अपनी सारी कहानी बता दी.
बुजुर्ग बोले -” चिंता मत करो. मेरा नाम जॉन डी . रॉकफ़ेलर है. मैं तुम्हे नहीं जानता,पर तुम मुझे सच्चे और ईमानदार लग रहे हो. इसलिए मैं तुम्हे दस लाख डॉलर का कर्ज देने को तैयार हूँ.” फिर जेब से चेकबुक निकाल कर उन्होंने रकम दर्ज की और उस व्यक्ति को देते हुए बोले, “नौजवान, आज से ठीक एक साल बाद हम ठीक इसी जगह मिलेंगे. तब तुम मेरा कर्ज चुका देना.” इतना कहकर वो चले गए. युवक शॉक्ड था.
रॉकफ़ेलर तब अमेरिका के सबसे अमीर व्यक्तियों में से एक थे. युवक को तो भरोसा ही नहीं हो रहा था की उसकी लगभग सारी मुश्किल हल हो गयी. उसके पैरो को पंख लग गये.
घर पहुंचकर वह अपने कर्जो का हिसाब लगाने लगा. बीसवी सदी की शुरुआत में 10 लाख डॉलर बहुत बड़ी धनराशि होती थी और आज भी है. अचानक उसके मन में ख्याल आया. उसने सोचा एक अपरिचित व्यक्ति ने मुझपे भरोसा किया, पर मैं खुद पर भरोसा नहीं कर रहा हूँ. यह ख्याल आते ही उसने चेक को संभाल कर रख लिया. उसने निश्चय कर लिया की पहले वह अपनी तरफ से पूरी कोशिश करेगा, पूरी मेहनत करेगा की इस मुश्किल से निकल जाए. उसके बाद भी अगर कोई चारा न बचे तो वो चेक यूज़ करेगा. उस दिन के बाद युवक ने खुद को झोंक दिया. बस एक ही धुन थी, किसी तरह सारे कर्ज चुकाकर अपनी प्रतिष्ठा को फिर से पाना हैं. उसकी कोशिशे रंग लाने लगी. कारोबार उबरने लगा, कर्ज चुकने लगा. साल भर बाद तो उसकी हालत पहले से बहुत सुधर चुकी थी
निर्धारित दिन ठीक समय वह बगीचे में पहुँच गया. वह चेक लेकर रॉकफ़ेलर की राह देख रहा था की वे दूर से आते दिखे. जब वे पास पहुंचे तो युवक ने बड़ी श्रद्धा से उनका अभिवादन किया. उनकी ओर चेक बढाकर उसने कुछ कहने के लिए मुंह खोल ही था की एक नर्स भागते हुए आई और झपट्टा मारकर वृद्ध को पकड़ लिया. युवक हैरान रह गया.
नर्स बोली, “यह पागल बार बार पागलखाने से भाग जाता हैं और लोगो को जॉन डी . रॉकफ़ेलर के रूप में चेक बाँटता फिरता हैं. ” अब वह युवक पहले से भी ज्यादा हैरान रह गया. जिस चेक के बल पर उसने अपना पूरा डूबता कारोबार फिर से खड़ा किया,वह फर्जी था. पर यह बात जरुर साबित हुई की वास्तविक जीत हमारे इरादे , हौंसले और प्रयास में ही होती हैं. हम सभी यदि खुद पर विश्वास रखे तो यक़ीनन किसी भी असुविधा से, सिचुएशन से निपट सकते है.

01/02/2022

Bhai bahan ka rishta

09/01/2022

*Positive attitude*

एक घर के पास काफी दिन से एक बड़ी इमारत का काम चल रहा था।
वहां रोज मजदूरों के छोटे-छोटे बच्चे एक दूसरे की शर्ट पकडकर रेल-रेल का खेल खेलते थे।

रोज कोई बच्चा इंजिन बनता और बाकी बच्चे डिब्बे बनते थे...

इंजिन और डिब्बे वाले बच्चे रोज बदल जाते,
पर...

केवल चङ्ङी पहना एक छोटा बच्चा हाथ में रखा कपड़ा घुमाते हुए रोज गार्ड बनता था।

*एक दिन मैंने देखा कि* ...

उन बच्चों को खेलते हुए रोज़ देखने वाले एक व्यक्ति ने कौतुहल से गार्ड बनने वाले बच्चे को पास बुलाकर पूछा....

"बच्चे, तुम रोज़ गार्ड बनते हो। तुम्हें कभी इंजिन, कभी डिब्बा बनने की इच्छा नहीं होती?"

इस पर वो बच्चा बोला...

"बाबूजी, मेरे पास पहनने के लिए कोई शर्ट नहीं है। तो मेरे पीछे वाले बच्चे मुझे कैसे पकड़ेंगे... और मेरे पीछे कौन खड़ा रहेगा....?

इसीलिए मैं रोज गार्ड बनकर ही खेल में हिस्सा लेता हूँ।

"ये बोलते समय मुझे उसकी आँखों में पानी दिखाई दिया।

आज वो बच्चा मुझे जीवन का एक बड़ा पाठ पढ़ा गया...

*अपना जीवन कभी भी परिपूर्ण नहीं होता। उसमें कोई न कोई कमी जरुर रहेगी....*

वो बच्चा माँ-बाप से ग़ुस्सा होकर रोते हुए बैठ सकता था। परन्तु ऐसा न करते हुए उसने परिस्थितियों का समाधान ढूंढा।

हम कितना रोते हैं?
कभी अपने साँवले रंग के लिए, कभी छोटे क़द के लिए, कभी पड़ौसी की बडी कार, कभी पड़ोसन के गले का हार, कभी अपने कम मार्क्स, कभी अंग्रेज़ी, कभी पर्सनालिटी, कभी नौकरी की मार तो कभी धंदे में मार...

हमें इससे बाहर आना पड़ता है....

*ये जीवन है... इसे ऐसे ही जीना पड़ता है।*
ये जीवन है....इस जीवन का यही है.यही है....रंग रूप.......
Let's be positive... Have a great New Year arrive My near and dears......
Pramod.

22/12/2021

copied

ਕੱਲ੍ਹ ਉਸਨੇ ਮੈਨੂੰ ਪੁੱਛਿਆ
ਕਿ
ਮੈਂ ਤੇਰੀ
ਕਿੰਨਵੀਂ ਮੁਹੱਬਤ ਹਾਂ?
ਉਸਦਾ ਇਹ ਪ੍ਰਸ਼ਨ ਸੁਣਕੇ
ਮੈਂ ਹਲਕਾ ਜਿਹਾ ਮੁਸਕੁਰਾਈ
ਤੇ ਫਿਰ ਉਸਦੇ ਪ੍ਰਸ਼ਨ ਦਾ
ਜਵਾਬ ਦੇਣ ਦੇ ਫਰਜ਼ ਨਾਲ
ਉਸਨੂੰ ਕਿਹਾ
ਕਿ ਤੂੰ ਮੁਹੱਬਤ ਨੂੰ
ਕਿਉਂ ਐਵੇਂ
ਗਣਿਤ ਨਾਲ ਜੋੜ ਰਿਹਾ ਏਂ
ਮੁਹੱਬਤ ਦੀ ਕੋਈ ਗਿਣਤੀ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦੀ
ਮੁਹੱਬਤ ਤਾਂ ਇਕ ਅਹਿਸਾਸ ਹੈ
ਕਿਸੇ ਖ਼ਾਸ ਸ਼ਖਸ ਲਈ
ਤੁਹਾਡੇ ਦਿਲ ਅੰਦਰ ਪਲ ਰਹੀਆਂ
ਭਾਵਨਾਵਾਂ ਹਨ
ਹੁਣ, ਤੂੰ ਤੇ ਮੈਂ
ਇਕੱਠੇ ਹਾਂ
ਤੇ ਸਾਡੇ ਇਹ ਅਹਿਸਾਸ
ਮਜ਼ਬੂਤ ਹੋ ਰਹੇ ਨੇ
ਤੇਰੇ ਲਈ ਮੇਰੇ ਅੰਦਰਲੇ ਜਜ਼ਬਾਤ
ਉੱਛਲ ਰਹੇ ਨੇ
ਤੇਰੇ ਮੇਰੇ ਅਹਿਸਾਸ ਹੁਣ
ਇੱਕ ਦੂਜੇ ਵਿੱਚ ਸਮਾਅ ਰਹੇ ਨੇ
ਤੇ ਇੱਕ ਨਵੇਂ ਰਿਸ਼ਤੇ ਦੀ
ਸ਼ੁਰੂਆਤ ਹੋ ਰਹੀ ਹੈ।

15/12/2021

समाज की एक कड़वी हक़ीक़त:-

जिसके गवाह हम सब हैं, जिसके ज़िम्मेदार हम सब हैं।

यह दर्दनाक घटना एक परिवार की है। जिसमें परिवार का मुखिया, उसकी पत्नी और दो बच्चे थे। जो जैसे तैसे अपना जीवन घसीट रहे थे।

घर का मुखिया एक लम्बे अरसे से बीमार था। जो जमा पूंजी थी वह डॉक्टरों की फ़ीस और दवाखानों पर लग चुकी थी। लेकिन वह अभी भी चारपाई से लगा हुआ था। और एक दिन इसी हालत में अपने बच्चों को अनाथ कर इस दुनिया से चला गया।
रिवाज़ के अनुसार तीन दिन तक पड़ोस से खाना आता रहा, पर चौथे दिन भी वह मुसीबत का मारा परिवार खाने के इन्तजार में रहा मगर लोग अपने काम धंधों में लग चुके थे, किसी ने भी इस घर की ओर ध्यान नहीं दिया।
बच्चे अक्सर बाहर निकलकर सामने वाले सफेद मकान की चिमनी से निकलने वाले धुएं को आस लगाए देखते रहते। नादान बच्चे समझ रहे थे कि उनके लिए खाना तैयार हो रहा है। जब भी कुछ क़दमों की आहट आती उन्हें लगता कोई खाने की थाली ले आ रहा है। मगर कभी भी उनके दरवाजे पर दस्तक न हुई।
माँ तो माँ होती है, उसने घर से रोटी के कुछ सूखे टुकड़े ढूंढ कर निकाले। इन टुकड़ों से बच्चों को जैसे तैसे बहला फुसला कर सुला दिया।

अगले दिन फिर भूख सामने खड़ी थी। घर में था ही क्या जिसे बेचा जाता, फिर भी काफी देर "खोज" के बाद चार चीज़ें निकल आईं। जिन्हें बेच कर शायद दो समय के भोजन की व्यवस्था हो गई। बाद में वह पैसा भी खत्म हो गया तो जान के लाले पड़ गए। भूख से तड़पते बच्चों का चेहरा माँ से देखा नहीं गया। सातवें दिन विधवा माँ ही बड़ी सी चादर में मुँह लपेट कर मुहल्ले की पास वाली दुकान पर जा खड़ी हुई।
दुकानदार से महिला ने उधार पर कुछ राशन माँगा तो दुकानदार ने साफ इंकार ही नहीं किया बल्कि दो चार बातें भी सुना दीं। उसे खाली हाथ ही घर लौटना पड़ा। एक तो बाप के मरने से अनाथ होने का दुख और ऊपर से लगातार भूख से तड़पने के कारण उसके सात साल के बेटे की हिम्मत जवाब दे गई और वह बुखार से पीड़ित होकर चारपाई पर पड़ गया। बेटे के लिए दवा कहाँ से लाती, खाने तक का तो ठिकाना था नहीं। तीनों घर के एक कोने में सिमटे पड़े थे। माँ बुखार से आग बने बेटे के सिर पर पानी की पट्टियां रख रही थी, जबकि पाँच साल की छोटी बहन अपने छोटे हाथों से भाई के पैर दबा रही थी। अचानक वह उठी, माँ के कान से मुँह लगा कर के बोली "माँ, भाई कब मरेगा???"
माँ के दिल पर तो मानो जैसे तीर चल गया, तड़प कर उसे छाती से लिपटा लिया और पूछा "मेरी बच्ची, तुम यह क्या कह रही हो?"
बच्ची मासूमियत से बोली,
"हाँ माँ ! भाई मरेगा तो लोग खाना देने आएँगे ना???"

कृपया अपनी दौलत को धर्म के नाम पर चढ़ावा चढ़ाने की बजाय किसी असहाय भूखे को खाना खिलाकर पुण्य प्राप्त करें।
इससे सारे जहाँ के मालिक भी खुश होंगे और आप को भी सूकून मिलेगा ।
दिल को अगर यह मेसेज अच्छा लगा हो तो आप इसे शेयर करें ताकि कोई भी बहन भूख के कारण अपने भाई के मरने की दुआ ना करे। आपको किसी भी प्रकार की बाध्यता नहीं है कि 10 लोगों को यह SMS FORWARD करो और तीन दिन में आपकी मनोकामना पूरी होगी या इंकार करने पर दो साल तक कोई भी अच्छा काम नही होगा, ऐसा कुछ भी नहीं है। बस एक ज़िम्मेदारी है जिससे ज़िन्दगी ज़रूर खुशगवार हो जाएगी !

14/12/2021

*❤‍🩹दुआ❤‍🩹*
~~~~~~~~~
मेरी फैक्ट्री के पास एक *Breakfast point* है. हम वहां अक्सर जाते है वहां बहुत भीड़ होती है।

*वहां मैंने कई बार नोटिस किया कि एक आदमी आता है जी भर के खाता है और खाने के बाद भीड़ का फायदा उठाते हुए चुपचाप बिना पैसा दिए हुए निकल जाता है।*

एक दिन जब वो आदमी खा रहा था मैंने रेस्तरां के मालिक को चुपचाप मोबाइल किया कि *ये भाई, जो खा रहा है, खा पी के चुपचाप भीड़ का फायदा उठाते हुए बिना बिल का पेमेंट किये निकल जायेगा।*

पर Breakfast point का मालिक मेरी बात पर मुस्कराया और बोला *कि उस भाई को खाने दीजिये और बिना एक शब्द कहे जाने दीजिए ....फिर मैं आपसे बात करता हूँ*

हमेशा की तरह, खाने पीने के बाद उस भाई ने आसपास देखा और चुपचाप बिना पैसे दिए भीड़ के बीच मे फिर रफू चक्कर हो गया

जब वो चला गया तो मैंने मालिक से पूछा कि *जानने के बाद भी की वो पेमेंट किये वगैर जाएगा, आपने उसे बिना पेमेंट किये क्यों जाने दिया??*

*ढाबे मालिक के जवाब ने मेरे होश उड़ा दिए।*

Breakfast Point का मालिक बोला आप अकेले नही हैं मुझे बहुत से भाइयों ने ये बात बताई की ये आदमी ऐसा करता है

उसने कहा कि ये आदमी मेरे से दूर शॉप के front में बैठता है और जब वो देखता है कि भीड़ है तो वो चुपचाप निकल जाता है

*मैंने हमेशा उसको नज़रअंदाज़ किया और बिना पैसे दिए जाने के लिए कभी नही पकड़ा, कभी नही रोका, और कभी उसकी बेइज़्ज़ती भी नही कीI*

कयुंकि मैं मानता हूं कि *वो ईश्वर का एक ऐसा बन्दा है जो मेरी शॉप में भीड़ होने के लिए दुआ करता है* और मेरे रेस्तरां में जो भीड़ है वो इस ईश्वर के बन्दे की दुआ की बजह से है

वो मेरी शॉप के सामने बैठेगा, दुआ करेगा कि भीड़ आये और जब भी वो आता है मेरे रेस्तरां में बहुत भीड़ होती भी है।

मैं उसकी दुआ की रेस्तरां में भीड़ हो और ईश्वर की स्वीकारोक्ति के बीच मे रोड़ा डालकर अपने ही पैर पर कुल्हाड़ी मार कर अपनी किस्मत खराब नही करना चाहता।

*मैं उसे कभी नही रोकूंगा, दुआ में बहुत असर है*

16/11/2021

छोटी थी जब, बहुत ज्यादा बोलती थी
माँ हमेशा झिडकती ,
चुप रहो ! बच्चे ज्यादा नहीं बोलते .

थोड़ी बड़ी हुई जब , थोड़ा ज्यादा बोलने पर
माँ फटकार लगाती
चुप रहो ! बड़ी हों रही हों .

जवान हुई जब , थोड़ा भी बोलने पर
माँ जोर से डपटती
चुप रहो , दूसरे के घर जाना है .

ससुराल गई जब , कु़छ भी बोलने पर
सास ने ताने कसे ,
चुप रहो , ये तुम्हारा मायका नहीं .

गृहस्थी संभाला जब , पति की किसी बात पर बोलने पर
उनकी डांट मिली ,
चुप रहो ! तुम जानती ही क्या हों ?

नौकरी पर गई , सही बात बोलने पर
कहा गया
चुप रहो ! अगर काम करना है तो

थोड़ी उम्र ढली जब , अब जब भी बोली तो
बच्चों ने कहा
चुप रहो ! तुम्हें इन बातों से क्या लेना .

बूढ़ी हों गई जब , कुछ भी बोलना चाहा तो
सबने कहा
चुप रहो ! तुम्हें आराम की जरूरत है .

इन चुप्पी की तहों में , आत्मा की गहों में
बहुत कुछ दबा पड़ा है
उन्हें खोलना चाहती हूँ , बहुत कुछ बोलना चाहती हूँ
पर सामने यमराज खड़ा है , कहा उसने
चुप रहो ! तुम्हारा अंत आ गया है
और मैं चुपचाप चुप हो गई
हमेशा के लिए .🌹🌹🌹🌹 🙏🙏

14/11/2021

Copied

*Comfortable attitude*

I asked one of my friends who has crossed 60 & is heading to 70.
What sort of change he is feeling in him?
He sent me the following
very interesting lines,
which i would like to share
with you all.....
1) After loving my parents,
my siblings, my spouse,
my children, my friends,
now I have started loving
myself.
2) I just realised that I am not
“Atlas”.
The world does not rest on
my shoulders.
3) I now stopped bargaining
with vegetables & fruits
vendors.
After all, a few Rupees more
is not going to burn a hole in
my pocket but it might help
the poor fellow save for his
daughter’s school fees.
4) I pay the taxi driver without
waiting for the change.
The extra money might
bring a smile on his face.
After all he is toiling much
harder for a living than me
5) I stopped telling the elderly
that they've already
narrated that story many
times.
After all, the story makes
them walk down the
memory lane & relive
the past.
6) I have learnt not to correct
people even when I know
they are wrong.
After all, the onus of making
everyone perfect is not on
me.
Peace is more precious than
perfection.
7) I give compliments freely &
generously.
After all it's a mood
enhancer not only for the
recipient, but also for me
😎 I have learnt not to bother
about a crease or a spot on
my shirt.
After all, personality speaks
louder than appearances.
9) I walk away from people
who don't value me.
After all, they might not
know my worth,
but I do.
10) I remain cool when
someone plays dirty
politics to outrun me in the
rat race.
After all, I am not a rat &
neither am I in any race.
11) I am learning not to be
embarrassed by my
emotions.
After all, it's my emotions
that make me human.
12) I have learnt that its better
to drop the ego than to
break a relationship.
After all, my ego will keep
me aloof whereas with
relationships I will never
be alone*.
13) I have learnt to live each
day as if it's the last.
After all, it might be the last.
14) I am doing what makes me
happy.
After all, I am responsible
for my happiness, and
I owe it to me.
☘ 🥒

18/10/2021

एक दिन एक पेंसिल ने इरेज़र (रबर) से कहा – “मुझे माफ़ कर दो…”

इरेज़र ने कहा – “क्यों? क्या हुआ? तुमने तो कुछ भी गलत नहीं किया!”

पेंसिल बोली – “मुझे यह देखकर दुःख होता है कि तुम्हें मेरे कारण चोट पहुँचती है. जब कभी मैं कोई गलती करती हूँ तब तुम उसे सुधारने के लिए आगे आ जाते हो. मेरी गलतियों के निशान मिटाते-मिटाते तुम खुद को ही खो बैठते हो. तुम छोटे, और छोटे होते-होते अपना अस्तित्व ही खो देते हो”.

इरेज़र ने कहा – “तुम सही कहती हो लेकिन मुझे उसका कोई खेद नहीं है. मेरे होने का अर्थ ही यही है! मुझे इसीलिए बनाया गया कि जब कभी तुम कुछ गलत कर बैठो तब मैं तुम्हारी सहायता करूं. मुझे पता है कि मैं एक दिन चला जाऊँगा और तुम्हारे पास मेरे जैसा कोई और आ जाएगा. मैं अपने काम से बहुत खुश हूँ. मेरी चिंता मत करो. मैं तुम्हें उदास नहीं देख सकता.”

पेंसिल और इरेज़र के बीच घटा यह संवाद बहुत प्रेरक है. उन्हीं की भाँती माता-पिता इरेज़र और बच्चे पेंसिल की तरह हैं. माता-पिता अपने बच्चों की गलतियों को सुधारने के लिए सदैव तत्पर रहते हैं. इस प्रक्रिया में उन्हें कभी-कभी ज़ख्म भी मिलते हैं और वे छोटे – बूढ़े होते हुए एक दिन हमेशा के लिए चले जाते हैं. बच्चों को उनकी जगह कोई और (जीवनसाथी) मिल जाता है लेकिन माता-पिता अपने बच्चों का हित देखकर हमेशा खुश ही होते हैं. वे अपने बच्चों पर कभी कोई विपदा या चिंता मंडराते नहीं देख सकते.

16/10/2021

_पैसा आपका है लेकिन संसाधन समाज के हैं!_

_जर्मनी एक highly industrialized देश है। ऐसे देश में, बहुत से लोग सोचेंगे कि वहां के लोग बड़ी luxurious लाइफ जीते होंगे।_

_जब हम हैम्बर्ग पहुंचे, मेरे कलीग्स एक रेस्टोरेंट में घुस गए, हमने देखा कि बहुत से टेबल खाली थे। वहां एक टेबल था जहाँ एक यंग कपल खाना खा रहा था। टेबल पर बस दो dishes और beer की दो bottles थीं। मैं सोच रहा था कि क्या ऐसा सिंपल खाना रोमांटिक हो सकता है, और क्या वो लड़की इस कंजूस लड़के को छोड़ेगी!_

_एक दूसरी टेबल पर कुछ बूढी औरतें भी थीं। जब कोई डिश सर्व की जाती तो वेटर सभी लोगों की प्लेट में खाना निकाल देता, और वो औरतें प्लेट में मौजूद खाने को पूरी तरह से ख़तम कर देतीं।_

_चूँकि हम भूखे थे तो हमारे लोकल कलीग ने हमारे लिए काफी कुछ आर्डर कर दिया। जब हमने खाना ख़तम किया तो भी लगभग एक-तिहाई खाना टेबल पर बचा हुआ था।_

_जब हम restaurant से निकल रहे थे, तो उन बूढी औरतों ने हमसे अंग्रेजी में बात की, हम समझ गए कि वे हमारे इतना अधिक खाना waste करने से नाराज़ थीं।_

_” हमने अपने खाने के पैसे चुका दिए हैं, हम कितना खाना छोड़ते हैं इससे आपका कोई लेना-देना नहीं है।”, मेरा कलीग उन बूढी औरतों से बोला। वे औरतें बहुत गुस्से में आ गयीं। उनमे से एक ने तुरंत अपना फ़ोन निकला और किसी को कॉल की। कुछ देर बाद, Social Security Organisation का कोई आदमी अपनी यूनिफार्म में पहुंचा। मामला समझने के बाद उसने हमारे ऊपर 50 Euro का fine लगा दिया। हम चुप थे।_

_ऑफिसर हमसे कठोर आवाज़ में बोला, “उतना ही order करिए जितना आप consume कर सकें, पैसा आपका है लेकिन संसाधन सोसाइटी के हैं। दुनिया में ऐसे बहुत से लोग हैं जो संसाधनों की कमी का सामना कर रहे हैं। आपके पास संसाधनों को बर्वाद करने का कोई कारण नहीं है।”_

_इस rich country के लोगों का mindset हम सभी को लज्जित करता है। हमे सचमुच इस पर सोचना चाहिए। हम ऐसे देश से हैं जो संसाधनों में बहुत समृद्ध नहीं है। शर्मिंदगी से बचने के लिए हम बहुत अधिक मात्रा में आर्डर कर देते हैं और दूसरों को treat देने में बहुत सा food waste कर देते हैं।_

_The Lesson Is – अपनी खराब आदतों को बदलने के बारे में गम्भीरता से सोचें। Expecting acknowledgement, कि आप ये मैसेज पढ़ें और अपने कॉन्टेक्ट्स को फॉरवर्ड करें।_

_Very True- “MONEY IS YOURS BUT RESOURCES BELONG TO THE SOCIETY / पैसा आपका है लेकिन संसाधन समाज के हैं।”_

_दोस्तों, कोई देश महान तब बनता है जब उसके नागरिक महान बनते हैं। और महान बनना सिर्फ बड़ी-बड़ी achievements हासिल करना नही है…महान बनना हर वो छोटे-छोटे काम करना है जिससे देश मजबूत बनता है आगे बढ़ता है। खाने की बर्बादी रोकना, पानी को waste होने से बचाना, बिजली को बेकार ना करना…ये छोटे-छोटे कदम हैं जो देश को मजबूत बनाते हैं।_

_आइये Ratan Tata जी द्वारा share किये गए इस inspirational incident से हम एक सबक लें और अपने-अपने स्तर पर देश के बहुमूल्य resources को बर्वाद होने से बचाएं और ये बात हमेशा याद रखें कि भले पैसा हमारा है पर संसाधन देश ka
*_धन्यवाद।_*

Address

Prashant Vihar
Delhi
110085

Opening Hours

Monday 9am - 5pm
Sunday 9am - 5pm

Telephone

9711771116

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Ranju Virk posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Business

Send a message to Ranju Virk:

Share