16/04/2018
राधे राधे 🙏🏻😊
चलती चक्की देखकर दिया कबिरा रोय |
दो पाटन के बीच में साबुत बचा न कोय ||
जो मनुष्य भगवान् की शरण में जाता है वही बचता है | जो दाना कील के पास रहता है वह बच जाता है | चक्की में जाने से पिस जाता है | महर्षि पतंजलि कहते हैं –
ईश्वर प्रणीधानाद्वा, तस्य वाचक: प्रणव: |
तज्जपस्तदर्थ भावनाम ||
यहाँ ॐ की महिमा कही है | ॐ, राम, कृष्ण, अल्ला, खुदा सब एक ही हैं, जो जिसको रुचे वह जपे | पानी, जल, वाटर सब एक ही वस्तु के नाम हैं | प्रभु के हजारों नाम हैं | कोई हजारों नाम को पुकारे तो भगवान् प्रसन्न हो जाते हैं, इसलिये विष्णु सहस्रनाम की ज्यादा महिमा है | प्रात: काल उठकर नित्य विष्णु सहस्रनाम का पाठ करो, गीता विष्णु सहस्रनाम तो रत्नों की खान है |
भगवद्गीता किन्चिदधीता तस्य यम: कीं कुरुते चर्चाम |
जिसने तनिक भी गीता पढ़ी, उसकी यमराज भी चर्चा नहीं कर सकते | मैं इसके लिये जोर से कह सकता हूँ कि गीता से बढ़कर कोई पुस्तक नहीं है |
गीता नित्य संगीत की तरह गाना चाहिये | गीता का भाव समझकर अर्थ को समझकर एक अध्याय का पाठ करने वाला अठारह अध्याय के पाठ करने वाले से श्रेष्ठ है | दूसरा एक श्लोक धारण करता है वह सारी गीता के नित्य पाठ से विशेष है | वही पुरुष धन्य है जिसका जीवन गीतामय है |